PC: anandabazar
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विभिन्न देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाकर वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुँचाया है। अमेरिकी संघीय सर्किट अपील अदालत ने शुक्रवार (स्थानीय अमेरिकी समय) को टैरिफ लगाने के उनके कई फैसलों को 'अवैध' करार दिया। ट्रंप को बताया गया है कि इस तरह से टैरिफ नहीं लगाए जा सकते। अदालत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का इस्तेमाल करके टैरिफ लगाकर अपनी शक्ति की सीमा पार कर ली है। मौजूदा हालात में, यह ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। हालाँकि अदालत ने अभी तक टैरिफ लगाने के फैसले पर रोक नहीं लगाई है। ट्रंप को 14 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। इस बार वह इस अदालत के फैसले को चुनौती देंगे और सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।
लेकिन अदालत ने ट्रंप के फैसले को अवैध क्यों कहा? अमेरिकी कानून में क्या है? टैरिफ युद्ध छेड़ने के लिए वह किस कानून का इस्तेमाल ढाल के तौर पर कर रहे थे? क्या सुप्रीम कोर्ट भी अपील अदालत की इस टिप्पणी से सहमत होगा? शुक्रवार के फैसले के बाद, वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऐसे ही सवाल घूम रहे हैं।
ट्रंप का तर्क
ट्रंप ने विभिन्न देशों के उत्पादों पर टैरिफ लगाने के लिए 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) का सहारा लिया है। पिछले मई में, अमेरिका की एक निचली अदालत ने कहा था कि इस कानून का इस्तेमाल करके वह अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं। अपील अदालत ने भी उस फैसले को बरकरार रखा। पिछले अप्रैल में, ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका का कई देशों के साथ 'व्यापार घाटा' है। चाहे दोस्त हों या दुश्मन, सभी अमेरिका की व्यापार नीति का फायदा उठा रहे हैं। इससे अमेरिकी निर्माताओं को परेशानी हो रही है। इसी आधार पर, उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की और विशेष आर्थिक शक्तियों का प्रयोग शुरू किया। ट्रंप ने पिछले फरवरी में इस कानून के ज़रिए मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अमेरिका में अवैध आव्रजन को रोकने में विफल रहने के लिए अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे।
कानून क्या कहता है
IEEPA के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति को एक विशेष प्रकार की आर्थिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके ज़रिए वह राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं और विभिन्न आर्थिक लेन-देन को नियंत्रित कर सकते हैं। इस कानून के तहत, राष्ट्रपति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए विभिन्न आर्थिक उपाय करते हैं। यदि कोई बाहरी स्रोत अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनता है, तो राष्ट्रपति उसके खिलाफ कार्रवाई भी कर सकते हैं।
अदालत ने इसे अवैध क्यों कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अतीत में कई बार इस कानून का इस्तेमाल विभिन्न प्रतिबंध लगाने, निर्यात नियंत्रण करने और लेनदेन को सीमित करने के लिए किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रम्प प्रशासन की पूर्व आर्थिक सलाहकार केली एन शॉ के हवाले से यह जानकारी दी। हालाँकि, इससे पहले किसी भी देश पर इस कानून के तहत टैरिफ नहीं लगाया गया है। कानूनी विशेषज्ञ शुरू से ही ट्रम्प को इसके बारे में चेतावनी देते रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने टैरिफ लगाने के लिए 1962 के व्यापार अधिनियम की धारा 232 का इस्तेमाल किया है। ये टैरिफ राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में लगाए गए थे। इस उद्देश्य के लिए IEEPA का इस्तेमाल नहीं किया गया था। दोनों कानून कहाँ भिन्न हैं? 1962 के कानून के अनुसार टैरिफ लगाने से पहले 270 दिनों के भीतर एक विशिष्ट जाँच और रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है। पहले यह पुष्टि करना आवश्यक है कि क्या अमेरिका के लिए कोई वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा है।
1917 के व्यापार अधिनियम के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का बार-बार दुरुपयोग किया गया है। बाद में अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने के लिए IEEPA पारित किया। कई लोगों का मानना है कि जाँच से बचने के लिए ट्रम्प ने 1962 के व्यापार अधिनियम के बजाय IEEPA का इस्तेमाल किया।
आगे क्या होगा
फ़िलहाल, ट्रम्प के पास 14 अक्टूबर तक का समय है। उन्होंने जिस देश के उत्पादों पर टैरिफ लगाया है, वह उस दिन तक प्रभावी रहेगा। अपील अदालत के फैसले के बाद, ट्रम्प ने संकेत दिया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने फैसले को 'गलत' भी बताया। उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला लागू होता है, तो यह अमेरिका के लिए 'विनाशकारी' होगा। अमेरिका आर्थिक रूप से कमज़ोर हो जाएगा। उन्हें विश्वास है कि अंततः वह कानूनी लड़ाई जीतेंगे। भारत और ब्राज़ील पर अमेरिका के निर्यात टैरिफ इस समय अपने उच्चतम स्तर पर हैं। ट्रम्प की नीतियों की देश और विदेश में बार-बार आलोचना हुई है। सभी की नज़र इस बात पर है कि अदालत के फैसले के बाद ट्रम्प किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
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