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शहबाज और ओली ने दिया धोखा तो भारत ने निभाई जापान से दोस्ती, चीन के सैन्य परेड से किया किनारा, क्यों भड़का है टोक्यो?

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टोक्‍यो/ काठमांडू/नई दिल्‍ली: जापान की आर्थिक मदद से अपना विकास कर रहे भारत के दो पड़ोसी देशों पाकिस्‍तान और नेपाल ने टोक्‍यो को धोखा दे दिया है। पाकिस्‍तान और नेपाल दोनों ही देशों के प्रधानमंत्री चीन के सैन्‍य परेड में शामिल होने जा रहे हैं। चीन 3 सितंबर को विक्‍ट्री डे सैन्‍य परेड निकालने जा रहा है जो वह दूसरे विश्‍वयुद्ध में जापान के सरेंडर के 80 साल पूरे होने पर निकाल रहा है। इस विशाल सैन्‍य परेड के जरिए चीन शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है। इसमें रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन, उत्‍तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन, पाकिस्‍तान के पीएम शहबाज शरीफ, नेपाली पीएम केपी ओली समेत दुनिया के कई नेता हिस्‍सा ले रहे हैं। वहीं बताया जा रहा है कि जापान ने राजनयिक माध्‍यमों से दुनियाभर के नेताओं से अपील की है कि वे इस चीनी साजिश का हिस्‍सा न बनें।



माना जा रहा है कि ताइवान तनाव के बीच जापान को अपमानित करने के लिए चीन इतने बड़े पैमाने पर सैन्‍य परेड निकाल रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह दोस्‍त जापान के साथ हैं और एससीओ सम्‍मेलन के बाद पीएम मोदी इस सैन्‍य परेड में हिस्‍सा नहीं लेंगे। पीएम मोदी जापान पहुंच गए हैं जहां उनका जोरदार स्‍वागत किया गया। उन्‍होंने एक भाषण में कहा कि भारत और जापान मिलकर एशिया की सदी को मजबूत करेंगे। पीएम मोदी ने जापानी बिजनसमैन से भारत में निवेश करने की अपील की। वहीं जापान ने कहा है कि वह अगले 10 साल में भारत में 68 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह पहले के टारगेट से दो गुना है।



जापान और भारत दोनों ही मिलकर पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन के आक्रामक व्‍यवहार को देखते हुए सुरक्षा सहयोग पर संयुक्‍त घोषणा को फिर से आगे बढ़ाएंगे। साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र को स्‍वतंत्र और मुक्‍त बनाने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान करेंगे। भारत चाहता है कि जापान उभरती तकनीक जैसे एआई और सेमीकंडक्‍टर के क्षेत्र में निवेश करे। जापान के बाद शनिवार को पीएम मोदी चीन के तिआनजिन शहर जाएंगे जहां एससीओ समिट होने जा रहा है। एससीओ सम्‍मेलन में पीएम मोदी रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी का शी जिनपिंग से मिलने का कार्यक्रम है। यह बैठकें ऐसे समय पर होने जा रही हैं जब अमेरिका ने भारत के खिलाफ 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है।



अमेरिका के दबाव के बाद भी भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा हुआ है। इसके बाद पीएम मोदी भारत वापस लौट आएंगे और 3 सितंबर को जापान के खिलाफ होने वाली चीनी सैन्‍य परेड में हिस्‍सा नहीं लेंगे। चीन जापान के दूसरे विश्‍वयुद्ध में सरेंडर का जश्‍न मना रहा है। जापान की सरकार ने पिछले कुछ सप्‍ताह में कई देशों से अनुरोध किया है कि वे चीन के इस सैन्‍य परेड में हिस्‍सा न लें। इसके बाद भी पाकिस्‍तान और नेपाल के पीएम दोनों ही शामिल होने जा रहे हैं। ये दोनों ही देश जापान से आर्थिक मदद पाते हैं।



जापान के इस सैन्‍य परेड का विरोध करने पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने कहा कि जापान को अपने आक्रामक इतिहास का ईमानदारी से सामना करना चाहिए और उस पर चिंतन भी करना चाहिए। इस केपी ओली के चीन के सैन्‍य परेड में हिस्‍सा लेने के ऐलान पर नेपाल में बवाल मच गया है। नेपाल और जापान के बीच ऐतिहासिक रिश्‍ता रहा है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि नेपाल का कोई पीएम चीन की इस सैन्‍य परेड में हिस्‍सा लेने जा रहा है। इससे पहले नेपाल के राष्‍ट्रपति रामचंद्र पौडयाल ने जापान के साथ करीबी रिश्‍ते को देखते हुए चीन के इस निमंत्रण को ठुकरा दिया था। जापान 1950 के दशक से नेपाल को आर्थिक सहायता दे रहा है। यहीं नहीं हजारों की तादाद में नेपाली लोग जापान में काम करते हैं। इसके बाद भी चीन के गुलाम बन चुके नेपाली पीएम ओली इस सैन्‍य परेड में हिस्‍सा लेने जा रहे हैं।

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