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उर्वरक संकट पर ओडिशा में सियासत गरमाई, नवीन पटनायक ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र

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भुवनेश्वर, 30 अगस्त . ओडिशा में किसानों के बीच चल रहे यूरिया संकट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन Patnaयक ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर किसानों की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है.

नवीन Patnaयक ने अपने पत्र में कृषि को ओडिशा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह राज्य की 70 फीसदी से अधिक आबादी की आजीविका का साधन है. पिछले दो दशकों में ओडिशा ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. कभी धान का आयातक रहने वाला राज्य आज देश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए एक बड़ा योगदानकर्ता बन चुका है. यह उपलब्धि आधुनिक तकनीक और कृषि इनपुट की उपलब्धता से संभव हुई है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस समय खरीफ सीजन चल रहा है और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति न होने से किसान बुरी तरह परेशान हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि State government के दावों के बावजूद, किसानों तक खाद नहीं पहुंच रही है.

Patnaयक ने अपने पत्र में लिखा कि 7.94 लाख टन यूरिया का भंडारण होने का दावा है, लेकिन किसान यूरिया के लिए तरस रहे हैं. राज्यभर में यूरिया की कालाबाजारी और मिलावट की शिकायतें सामने आ रही हैं. किसानों को सरकारी तय दाम से ज्यादा कीमत चुकाकर यूरिया खरीदना पड़ रहा है. कई आदिवासी जिलों में तो किसान आंदोलन की राह पर हैं.

नवीन Patnaयक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ‘मार्कफेड’, जो कि सरकारी नामित वितरण एजेंसी है, वह खाद को सीधे किसानों को देने के बजाय निजी व्यापारियों को सप्लाई कर रही है. इससे बिचौलियों को फायदा हो रहा है और किसान ठगा जा रहा है.

पत्र में Patnaयक ने तालचेर उर्वरक संयंत्र का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में शिलान्यास के समय यह वादा किया गया था कि संयंत्र 36 महीनों में चालू हो जाएगा, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी यह अब तक शुरू नहीं हो सका है. इससे राज्य के किसानों की उम्मीदें टूट गई हैं.

नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र से तत्काल कदम उठाने की अपील की है. उन्होंने मांग की कि खाद की कालाबाजारी और मिलावट पर तुरंत नकेल कसी जाए. दोषी डीलरों और सहकारी समितियों से जुड़े अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए. खरीफ सीजन में समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जाए ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके.

पीएसके

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